डॉ.बाबासाहब के महापरिनिर्वाण के बाद लंबे समय तक SC, ST एवँ पिछड़ो के अधिकारों को लडनेवाले नेताओं का अकाल पड़ गया था। उस समय डॉ. बाबासाहब के आंदोलन को दफन करने की साजिश की जा रही थी, तब भारत की राजनीति के इतिहास में बहुजन समाज के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक उत्थान के लिए बाबासाहब के बाद उनके कारवाँ आगे ले जानेवाले दूसरे मसीहा मान्यवर कांशीरामजी ने बहुजन समाज के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया। डॉ.बाबासाहब के राजनैतिक प्रजातंत्र और राष्ट्र निर्माण के आंदोलन का कोई कांशीराम से बड़ा उत्तराधिकारी हो ही नहीं सकता..!!! (मा.कांशीरामजी के साथ अहमदाबाद से प्रकाशभाई बैंकर साहब) हमारे बुजुर्गों के संघर्ष के कारण बदलाव आया है लेकिन बाबासाहब के जाने के बाद बदलाव रुका था। संघर्ष रूका और संघर्ष न होने के कारण बदलाव रूका । अगर हमें उस बदलाव को मंजिल तक पहुँचाना है तो ये बहुत जरूरी है कि हम सामाजिक और आर्थिक गैर बराबरी का अंत करे। डॉ.बाबासाहब ...